भित्तचित्र प्रदर्शनी व व्याख्यान में गूंजे जम्मू-कश्मीर और आंध्र-तेलंगाना की राजनीति के ऐतिहासिक आयाम
संवाददाता/दै.जन-संग्राम वर्धा : महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के समता भवन स्थित माधवराव सप्रे सभागार में शुक्रवार, २४ अप्रैल को भित्तचित्र प्रदर्शन एवं व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन इतिहास विभाग के प्रभारी डॉ. बालाजी चिरडे के निर्देशन में किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता लेखिका क्षमा कौल ने “जम्मूकश्मीर की राजनीति (१९५० से २००० तक)’ विषय पर विस्तार से अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में महाराजा हरि सिंह के योगदान, महाराजा रणजीत सिंह एवं गुलाब सिंह डोगरा की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने कश्मीर को भारत की ज्ञान परंपरा का अहम हिस्सा बताते हुए शेख अब्दुल्ला, पंडित जवाहरलाल नेहरू तथा नेशनल कॉन्फ्रेंस की राजनीति का विश्लेषण किया।
उन्होंने विशेष रूप से १९९० के दशक की घटनाओं और उस दौर के नरसंहार को भी स्पष्ट किया। वहां के पंडितों पर किस तरह वहाँ के आतंकवादियों ने कहर बरसाया और काश्मीर छोडने के लिए कैसे मजबूर किया उसकी आपबिती कहानी बताई। कार्यक्रम के दूसरे वक्ता वर्धा समाज कार्य संस्थान के एसोशिएट प्रोफेसर प्रोफेसर के. बालराजु ने “आंध्र प्रदेश-तेलंगाना की राजनीति’ विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने हैदराबाद रियासत के इतिहास पर प्रकाश डालत हए पाट्टी श्रीरामल के भाषाई राज्य के लिए दिए गए बलिदान का उल्लेख किया। साथ ही आध प्रदश क गठन क बाद क्षत्रीय असंतोष, संसाधनों के दोहन तथा “निलु, निधुलु, नियुक्तुलु’ (जल, फंड एवं रोजगार) के लिए चले सघषा का रखाकित किया।
उन्हान एन.टी. रामाराव, एन चंद्रबाबू नायडू तथा के चंद्रशेखर राव और तेलंगाना राष्ट्र समिति की राजनीति को स्पष्ट करते हुए क्षेत्रीय दलों की भूमिका और तेलंगाना राज्य गठन की पृष्ठभूमि का विर्श्लेषण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रोफेसर फरहद मलिक न की। उन्होंन अपन अध्यक्षीय उद्बोधन में दोनों वक्ताओं के विचारों की सराहना करते हुए विषय की प्रासंगिकता पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन वैभव तिवारी ने किया तथा आभार डॉ. मुन्नालाल गुप्ता ने ज्ञापित किया। इस अवसर पर डॉ. राकेश मिश्र, डॉ. परिमल प्रियदर्शी, डॉ. राकेश फकलियाल तथा डॉ. विधु दास खरे सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। ब़डी संख्या में विद्यार्थियों एवं बुद्धिजीवियों की सहभागिता से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।









